>अभिनव गाँव – विकसित राजस्थान की नींव

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मूल रूप से हमारा देश और प्रदेश गाँवों और शहरों में बंटा हुआ है। प्रदेश में 40 हजार से अधिक गाँव हैं और 222 शहर-क़स्बे हैं। प्रत्येक गाँव व क़स्बे का अपना विशिष्ट भूगोल इतिहास और परम्परा है, जिसके कारण इनकी आवश्यकताएं भी अलग हैं। हालांकि हमारे योजनाकार स्थानीयता को योजना निर्माण में स्थान देने के लिए योजनाओं का विकेन्द्रीकरण करने की बात करते हैं, परन्तु अभी भी गाँव-शहर के लोग अपने लिए योजना निर्माण में भागीदारी नहीं कर रहे हैं। योजना निर्माण वैसे भी भारतीय मानस में अपरिपक्व लोकतंत्र के कारण प्रमुख कार्य नहीं बन पाया है। जिन्हें योजना बनाने का कार्य करना है, वे स्थानान्तरण करने करवाने और इधर-उधर भटकने से अधिक कुछ नहीं कर रहे हैं। विधानसभा तो बच्चों के तू चोर मैं सिपाहीखेल का मंच भर रह गयी है। पानी के लिए नल पर झगड़ती महिलाओं का सा माहौल अब वहाँ बन गया है। ऐसी स्थिति में अभिनव राजस्थान के मित्र ही योजना निर्माण के लिए आगे बढ़ें, तो शायद यह कार्यमहत्वका लगने लगेगा। इस अंक में गाँव के योजना निर्माण पर मंथन करते हैं।

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